प्रश्न - उत्तर
बेबी कॉर्न क्या है ?
बेबी कॉर्न के नाम से ही इसका अर्थ निकालता है बेबी मतलब बच्चा और कॉर्न माने भुट्टा अथार्त बेबी कॉर्न मक्का का अपरिपक्व भुट्टा है जिसे दाना भरने से पहले ही तोड़ लिया जाता है। ध्यान रखने वाली बात यह है की दाना बनने के पश्चात यह काम का नहीं रहता है। बेबी कॉर्न का आकार 10-12 सेन्टीमीटर से बड़ा नहीं होना चाहिये। बेबीकॉर्न की खेती में ज़रूरी बातें। 1. पर्याप्त जल निकास वाली दोमट या काली दोमट मिट्टी फसल के लिए उपयुक्त हैं। 2. खरीफ में इसे जून-जुलाई, रबी में अक्टूबर-नवंबर, जायद हेतु जनवरी-फरवरी में बुवाई की जा सकती है। 3. प्रति हेक्टेयर 25-30 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। 4. खेत की तैयारी के पश्चात कतार में बीज 15 सेमी की दूरी पर लगाना चाहिए कतार से कतार की दुरी 45 सेमी रखे इस प्रकार एक हेक्टेयर में लगभग 150000 पौधे प्राप्त होंगे। 5. एक हेक्टेयर में 50 किग्रा नाईट्रोजन तथा 50 किग्रा फॉस्फोरस और 50 किग्रा पोटाश डालना चाहिए। नाईट्रोजन 50 किग्रा की पहली खुराक बुआई के 25 दिन बाद तथा समान मात्रा की दूसरी बार 45 दिन पर दी जानी चाहिए। 6. बेबीकॉर्न की फसल 60 दिनो में तोडऩे के लिए तैयार हो जाती है अतः फसल का ध्यान रखना चाहिए। समय पर तुड़ाई नहीं करने से भुट्टे में दाने बन जायेंगे और वो किसी काम के नहीं रहेंगे। 7. भुट्टो को तोड़ते समय उनका आकार 8-10 सेमी होना चाहिए। 8. वजन घटने से बचाने के लिए तोडऩे के तुरंत बाद इन्हें बाज़ार में बेच दें।
फेरोमोन क्या है ?
फेरोमोन ट्रैप को गंधपाश या प्रपंच भी कहते हैं। इस पाश में प्लास्टिक से बनी सरंचना होती है जिसके निचे एक थेली लटकी होती है। प्रपंच में ल्योर लगाकर खेत में टांग देते हैं। ल्योर में फेरोमोन द्रव्य (मादा कीट) की गंध होती है जो आस-पास मौजूद नर कीटों को आकर्षित करती है और नर कीट फंदे में आ जाता है। प्रपंच इस प्रकार बने होते हैं जिसमें कीट अंदर जाने के बाद बाहर नहीं आ सकते है। फेरोमोन ट्रैप से फसल में कीटो की संख्या का पता चल जाता है जिससे रसायनो के छिड़काव के सही समय का पता चल जाता है। फेरोमोन ट्रैप को प्रति हेक्टेयर 5 तक की संख्या में लगाना चाहिए। फेरोमोन क्या है ? यह मादा पतंगे द्वारा छोड़ी जाने वाली विशेष गंध होती है जो कि नर पतंगों को आकर्षित करती है। यह प्रत्येक कीट प्रजाति के लिए अलग अलग होती है। फेरोमोन ट्रैप के उपयोग से नर कीटो को पकड़ा जा सकता हे जिससे मादा अनिषेचित अंडे देती है जिसमे से सुंडिया बाहर नहीं आती है और फसल नुकसान से बची रहती है। फेरोमोन ट्रैप का उपयोग कैसे करें ? इस ट्रैप के इस्तेमाल के लिए खेत में 3-4 फ़ीट ऊंचाई की लकड़ी गाड देवे और इस डंडे के सहारे से फेरोमोन ट्रैप को बांधकर इसे लटका देवे। ट्रैप के ऊपर ढक्कन में बने स्थान पर ल्योर को फंसा देवे और सही प्रकार से लगा देवे। कीट एकत्र करने की थैली को ट्रैप में ठीक प्रकार से लगाकर इसका निचला सिरा बांध देवे। ट्रैप लगते समय इस बात की सावधानी रखे की ट्रैप के ऊपरी भाग फसल की ऊंचाई से 1 से 2 फ़ीट ऊपर रहे। प्रति हेक्टेयर पांच ट्रैप प्रर्याप्त हैं। एक ट्रैप से दूसरे ट्रैप की दूरी 25-30 मीटर रखनी चाहिए। फेरोमोन ट्रैप में ल्यूर को समय समय पर बदलते रहना चाहिए तथा कीड़ो को पकड़ने वाली थेली को भी खाली करते रहना चाहिए। इस नई तकनीक से किसान अपने खेतों पर कीड़ों की संख्या का आंकलन कर कीटनाशकों के उपयोग की रणनीति बना कर अनावश्यक रासायनिक उपचार से बच सकता है।
जैविक विधि से दीमक नियंत्रण के उपाय।
दीमक कृषि फसलों के मुख्य कीटो में से एक है। जैविक विधि से दीमक नियंत्रण के उपाय निम्न प्रकार है । • मक्का के भुट्टे से दाना निकलने के बाद, जो गिल्लियां बचती है, उन्हे एक मिट्टी के घड़े में इक्टठा करके घड़े को खेत में इस प्रकार गाढ़े कि घड़े का मुॅह जमीन से कुछ बाहर निकला हो। घड़े के ऊपर कपड़ा बांध दे तथा उसमें पानी भर दें। कुछ दिनाेंं में ही आप देखेगें कि घड़े में दीमक भर गई है। इसके उपरांत घड़े को बाहर निकालकर गरम कर लें ताकि दीमक समाप्त हो जावे। इस प्रकार के घड़े को खेत में 30-30 मीटर की दूरी पर गड़ाए तथा करीब 4 - 5 बार गिल्लियां बदलकर यह क्रिया दोहराएं। खेत में दीमक समाप्त हो जावेगी। • सुपारी के आकार की हींग एक कपड़े में लपेटकर तथा पत्थर में बांधकर खेत की ओर बहने वाली पानी की नाली में रख दें। उससे दीमक तथा उगरा रोग नष्ट हो जावेगा।
पाले से फसल बचाव कैसे करें।
अपने क्षेत्र में प्रतिवर्ष पाले से फसलो में नुकसान होता है। किसान भाई पाला पड़ने के समय का अंदाजा लगाकर बचाव के उपाय कर अपनी फसल को नुकसान से बचा सकते है। पाला पड़ने की सम्भावना का पता ऐसे करे - • शाम को मौसम साफ रहता है • हवा चलते चलते बंद हो जाती है • शाम को तापमान में अचानक गिरावट होती है पाले से बचाव के उपाय - • खेत की उतरी पश्चिमी मेड पर कचरा जलाकर धुँआ करें • छोटे पौधों को ढककर • बगीचे में छोटे पौधों पर टाटिया बांधकर • फसल में सिंचाई करके • मल्च बिछाकर • फसल में गंधक के अम्ल के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करके • पादप वृद्धि नियामकों के उपयोग द्वारा
नवीनतम लेख

सरसों की चोपाई विधि से बुवाई करके 34 की क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन प्राप्त किया
और अधिक पढ़ें............
























































